एक नज़र में
- कार्यकाल: बोर्ड की पहली बैठक से 5 साल (धारा 7)।
- योग्यता: 21 साल उम्र, उसी नगर निकाय के किसी भी वार्ड की मतदाता सूची में नाम, घर में चालू शौचालय।
- दो से ज़्यादा संतान का नियम 2026 में हटा; कक्षा 10 पास की शर्त 2019 में हटी।
- महापौर/सभापति/अध्यक्ष को चुने हुए पार्षद चुनते हैं — उम्मीदवार का पार्षद होना ज़रूरी नहीं।
- पार्षद को वेतन नहीं, बैठक भत्ता मिलता है — नगर निगम में ₹1,002 प्रति बैठक, महीने में अधिकतम ₹3,006।
नगर निकाय का बोर्ड
- राजस्थान में 2026 में 309 नगरीय निकाय हैं — 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिका (राज्य निर्वाचन आयोग, 19 अगस्त 2026)।
- सभी सीटें वार्डों से सीधे चुनाव से भरती हैं; हर निकाय में कम से कम 13 वार्ड (धारा 6(1))। कुल सीटों में से आधी महिलाओं के लिए आरक्षित (धारा 6(7))।
- राज्य सरकार मनोनीत सदस्य भी रखती है — नगर पालिका में 6, नगर परिषद में 8, नगर निगम में 12 — लेकिन उन्हें बैठकों में वोट का अधिकार नहीं।
- स्थानीय विधायक हर निकाय में और लोकसभा सांसद नगर परिषद व नगर निगम में वोट के अधिकार के साथ सदस्य होते हैं।
नगर निकाय और पार्षद के काम
धारा 45 के अनुसार हर नगर निकाय का कर्तव्य है कि वह इन कामों की उचित व्यवस्था करे:
- सफ़ाई और कचरा प्रबंधन, नाली व सीवरेज
- सड़कें, बाज़ार, सार्वजनिक शौचालय, स्ट्रीट लाइट
- अग्निशमन (फायर) सेवा और अतिक्रमण हटाना
- जन्म-मृत्यु पंजीकरण
- पार्क और नए इलाकों की योजना
पार्षद के अधिकार (धारा 52): किसी काम में लापरवाही या नगर निकाय की संपत्ति की बर्बादी की ओर ध्यान दिलाना, अध्यक्ष से प्रश्न पूछना और प्रस्ताव रखना, और सूचना देकर निकाय के रिकॉर्ड मुफ़्त देखना।
- बोर्ड की साधारण बैठक हर 60 दिन में कम से कम एक बार और साल में कम से कम 6 बार (धारा 51)।
- एक-तिहाई सदस्य विशेष बैठक माँग सकते हैं; अध्यक्ष को 7 दिन में बुलानी होती है।
- समितियाँ (धारा 55): कार्यकारी समिति और वित्त, स्वास्थ्य-स्वच्छता, भवन अनुमति व निर्माण, कच्ची बस्ती सुधार, नियम-उपनियम जैसी समितियाँ, हर एक में अधिकतम 10 सदस्य।
- 3 लाख या ज़्यादा आबादी वाले निकायों में वार्ड समितियाँ बनती हैं (धारा 54)।
महापौर / सभापति / अध्यक्ष का चुनाव
- 2026 में महापौर (नगर निगम), सभापति (नगर परिषद) और अध्यक्ष (नगर पालिका) को चुने हुए पार्षद चुनते हैं (निर्वाचन नियम 78)।
- उम्मीदवार का पार्षद होना ज़रूरी नहीं — जो पार्षद बनने योग्य है, वह भी लड़ सकता है; लेकिन सांसद, विधायक या पंचायती राज संस्था का सदस्य नहीं लड़ सकता। वोट सिर्फ़ चुने हुए पार्षद डालते हैं।
- उपमहापौर / उपसभापति / उपाध्यक्ष चुने हुए पार्षदों में से ही बनता है (नियम 79)।
- अविश्वास प्रस्ताव: पद संभालने के 2 साल के भीतर नहीं लाया जा सकता, और गिर जाए तो अगला 2 साल बाद ही (धारा 53)।
कौन पार्षद बन सकता है
- उम्र कम से कम 21 साल (धारा 21(ङ))।
- उसी नगर निकाय के किसी भी वार्ड का मतदाता — ज़रूरी नहीं कि उसी वार्ड का जहाँ से लड़ रहे हैं। आरक्षित सीट पर उसी वर्ग (SC/ST/OBC) का होना या महिला होना ज़रूरी।
- घर में चालू स्वच्छ शौचालय और परिवार का कोई सदस्य खुले में शौच न करे (धारा 21(छ), 2015 से)।
- कोई शैक्षणिक योग्यता नहीं: 2015 में जोड़ी गई कक्षा 10 पास की शर्त राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2019 से हटा दी गई।
- दो से ज़्यादा संतान: राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2026 (2026 का अधिनियम संख्या 7, राजपत्र 25 मार्च 2026) ने धारा 24 का खंड (xvii) हटा दिया — अब यह अयोग्यता नहीं।
अयोग्यता (धारा 24) के मुख्य कारण: केंद्र/राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या किसी प्राधिकरण में वेतन वाली या अंशकालिक नौकरी; सरकार के नियंत्रण वाले विश्वविद्यालय, निगम या सहकारी संस्था की नौकरी; 6 महीने या ज़्यादा की सज़ा; 5 साल या ज़्यादा की सज़ा वाले अपराध में आरोप तय होना; नगर निकाय के ठेके में हित; 2 साल से ज़्यादा का बकाया जिस पर वसूली शुरू हो चुकी हो। पार्षद एक साथ सांसद, विधायक या पंचायत सदस्य नहीं रह सकता (धारा 42)।
चुनाव खर्च की सीमा (2026): नगर निगम पार्षद ₹3,50,000, नगर परिषद पार्षद ₹2,50,000 और नगर पालिका सदस्य ₹1,50,000; परिणाम के 15 दिन में हिसाब देना होता है।
पार्षद का वेतन (बैठक भत्ता)
| पद | बैठक भत्ता | महीने में अधिकतम |
|---|---|---|
| पार्षद, नगर निगम | ₹1,002 प्रति बैठक | ₹3,006 |
| पार्षद, नगर परिषद | ₹835 प्रति बैठक | ₹2,505 |
| पार्षद, नगर पालिका | ₹668 प्रति बैठक | ₹2,003 |
स्वायत्त शासन विभाग आदेश 3958 (03.04.2025), 1 अप्रैल 2025 से; भुगतान नगर निकाय की अपनी आय से
मुख्यमंत्री ने 27 फरवरी 2026 को पंचायती राज व नगर निकाय अध्यक्षों-सदस्यों के मानदेय में 10% वृद्धि की घोषणा की थी। 28 सितंबर 2026 तक इसका लागू करने वाला आदेश हमें नहीं मिला, इसलिए ऊपर 1 अप्रैल 2025 से लागू दरें हैं — आदेश आते ही अपडेट करेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजस्थान में पार्षद की सैलरी कितनी होती है?
पार्षद को वेतन नहीं, बैठक भत्ता मिलता है — नगर निगम में ₹1,002 प्रति बैठक (महीने में अधिकतम ₹3,006), नगर परिषद में ₹835 (अधिकतम ₹2,505) और नगर पालिका में ₹668 (अधिकतम ₹2,003), 1 अप्रैल 2025 से।
पार्षद बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?
कम से कम 21 साल उम्र, उसी नगर निकाय के किसी वार्ड की मतदाता सूची में नाम, घर में चालू शौचालय, और धारा 24 की कोई अयोग्यता न हो। कोई शैक्षणिक योग्यता नहीं और 2026 से दो संतान वाला नियम भी नहीं।
पार्षद का कार्यकाल कितने साल का होता है?
नगर निकाय बोर्ड की पहली बैठक की तारीख से 5 साल (राजस्थान नगरपालिका अधिनियम धारा 7)।
महापौर का चुनाव कौन करता है?
2026 में महापौर, सभापति और अध्यक्ष को नगर निकाय के चुने हुए पार्षद चुनते हैं। उम्मीदवार पार्षद हो, यह ज़रूरी नहीं, लेकिन वोट सिर्फ़ चुने हुए पार्षद डालते हैं।
पार्षद क्या-क्या काम करवा सकता है?
पार्षद बोर्ड की बैठकों में अपने वार्ड की सफ़ाई, सड़क, नाली, रोशनी जैसे मुद्दे उठाता है, प्रश्न पूछता है, प्रस्ताव रखता है, समितियों में रहता है और निकाय के रिकॉर्ड देख सकता है। काम नगर निकाय के बजट और बोर्ड के फैसलों से होते हैं।
स्रोत
हर तथ्य इन्हीं आधिकारिक दस्तावेज़ों से लिया गया है
- राज्य निर्वाचन आयोग — नगरपालिका निर्वाचन विधि पुस्तिका 2026 (अधिनियम व नियम) (sec.rajasthan.gov.in)
- राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 (स्वायत्त शासन विभाग की प्रति) (lsg.urban.rajasthan.gov.in)
- SEC पत्र 4789 (13.07.2026) व राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2026 का राजपत्र (sec.rajasthan.gov.in)
- स्वायत्त शासन विभाग — पार्षद बैठक भत्ता (आदेश 3958) व महापौर/सभापति/अध्यक्ष मानदेय नियम 2025 (jankalyanfile.rajasthan.gov.in)
- सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) — प्रेस विज्ञप्तियाँ 19.08.2026 (निकाय चुनाव 2026, खर्च सीमा) व 23.09.2026 (महापौर चुनाव) (dipr.rajasthan.gov.in)
यह आम जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं — नामांकन या किसी आधिकारिक काम से पहले राज्य निर्वाचन आयोग / रिटर्निंग अधिकारी से पुष्टि करें। अस्वीकरण