वार्ड पंच अपने वार्ड से सीधे चुना गया ग्राम पंचायत का सदस्य है, और सरपंच पूरी पंचायत से सीधे चुना जाता है। पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र से सीधे चुने जाते हैं, जबकि प्रधान को पंचायत समिति के और जिला प्रमुख को जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य आपस में से चुनते हैं। मानदेय: सरपंच ₹6,679, प्रधान ₹11,689 और जिला प्रमुख ₹16,698 प्रति माह; वार्ड पंच ₹276, पंचायत समिति सदस्य ₹483 और जिला परिषद सदस्य ₹690 प्रति बैठक।
एक नज़र में
- सीधे जनता चुनती है: वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य।
- चुने सदस्य चुनते हैं: उपसरपंच, प्रधान-उपप्रधान, जिला प्रमुख-उपजिला प्रमुख।
- विधायक पंचायत समिति के, और सांसद-विधायक जिला परिषद के पदेन सदस्य होते हैं, पर प्रधान या जिला प्रमुख के चुनाव में वोट नहीं देते।
- सरपंच और वार्ड पंच का चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं होता; पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य का पार्टी चिह्न पर हो सकता है।
- हर पद का कार्यकाल संस्था की पहली बैठक से 5 साल।
तीन स्तर, सभी पद — एक नज़र में
| पद | कौन चुनता है | मानदेय / भत्ता | कानून |
|---|---|---|---|
| वार्ड पंच | ग्राम पंचायत के उस वार्ड के मतदाता | ₹276 प्रति बैठक | धारा 12 |
| सरपंच | पूरी ग्राम पंचायत के मतदाता | ₹6,679 प्रति माह | धारा 26, 32 |
| उपसरपंच | नए चुने पंच व सरपंच, आपस में से | अलग मानदेय नहीं | धारा 27, 32 |
| पंचायत समिति सदस्य | पंचायत समिति के उस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता | ₹483 प्रति बैठक | धारा 13 |
| प्रधान, उपप्रधान | पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य, आपस में से | प्रधान ₹11,689 प्रति माह | धारा 28, 33, 34 |
| जिला परिषद सदस्य | जिला परिषद के उस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता | ₹690 प्रति बैठक | धारा 14 |
| जिला प्रमुख, उपजिला प्रमुख | जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य, आपस में से | जिला प्रमुख ₹16,698 प्रति माह | धारा 29, 35 |
मानदेय: पंचायती राज विभाग की अधिसूचना, 1 अप्रैल 2025 से; बैठक भत्ता: अधिसूचना 210 (21.02.2023), 1 अप्रैल 2023 से। धाराएँ: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994।
वार्ड पंच कौन होता है, क्या करता है
हर ग्राम पंचायत वार्डों में बँटी होती है और हर वार्ड से एक पंच सीधे चुना जाता है; सरपंच और ये पंच मिलकर ग्राम पंचायत बनाते हैं (धारा 12)। पंच पंचायत की बैठकों में फ़ैसलों पर वोट देते हैं, नई पंचायत के गठन पर उपसरपंच चुनते हैं, और सरपंच के खिलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं (धारा 27, 37)।
हर वार्ड की वार्ड सभा (वार्ड के सभी वयस्क) साल में कम से कम दो बार बैठती है; वह विकास कामों के प्रस्ताव और लाभार्थियों की पहचान करती है (धारा 3, 7)। वार्ड पंच को मासिक मानदेय नहीं, ₹276 प्रति बैठक भत्ता मिलता है। पंच का चुनाव पार्टी चिह्न पर नहीं होता — सिर्फ़ मुक्त चिह्न मिलते हैं।
पंचायत समिति सदस्य और प्रधान (ब्लॉक स्तर)
पंचायत समिति में तीन तरह के सदस्य होते हैं: समिति के निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुने सदस्य, क्षेत्र के विधायक, और समिति की सभी ग्राम पंचायतों के सरपंच। विधायक और सरपंच समिति की बैठकों में वोट दे सकते हैं, पर प्रधान-उपप्रधान के चुनाव और हटाने में नहीं (धारा 13)। पंचायत समिति सदस्य को ₹483 प्रति बैठक भत्ता मिलता है।
प्रधान और उपप्रधान को पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य आपस में से चुनते हैं (धारा 28)। प्रधान के अधिकार (धारा 33):
- पंचायत समिति की बैठक बुलाना, अध्यक्षता करना और चलाना; समिति के सारे रिकॉर्ड तक पहुँच।
- समिति और उसकी स्थायी समितियों के फ़ैसले लागू करवाने के लिए विकास अधिकारी पर पर्यवेक्षण और नियंत्रण।
- समिति के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन पर समग्र पर्यवेक्षण।
- प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की तुरंत राहत के लिए विकास अधिकारी से सलाह करके साल में कुल ₹25,000 तक की मंज़ूरी; अगली बैठक में इसका अनुमोदन ज़रूरी।
- पंचायतों को उनकी योजनाओं में मार्गदर्शन और सहकारिता को बढ़ावा।
उपप्रधान प्रधान की गैरमौजूदगी में बैठक की अध्यक्षता करता है, प्रधान के लिखकर सौंपे अधिकार निभाता है, और प्रधान का चुनाव होने तक या प्रधान के 30 दिन से ज़्यादा छुट्टी पर होने पर प्रधान के अधिकार निभाता है (धारा 34)। प्रधान को ₹11,689 प्रति माह मानदेय मिलता है।
जिला परिषद सदस्य और जिला प्रमुख (जिला स्तर)
जिला परिषद में सीधे चुने सदस्यों के अलावा क्षेत्र के लोकसभा सांसद और विधायक, जिले में मतदाता के रूप में दर्ज राज्यसभा सांसद, और जिले की सभी पंचायत समितियों के प्रधान सदस्य होते हैं। ये पदेन सदस्य बैठकों में वोट दे सकते हैं, पर जिला प्रमुख-उपजिला प्रमुख के चुनाव और हटाने में नहीं (धारा 14)। जिला परिषद सदस्य को ₹690 प्रति बैठक भत्ता मिलता है।
जिला प्रमुख और उपजिला प्रमुख को जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य आपस में से चुनते हैं (धारा 29)। जिला प्रमुख के अधिकार (धारा 35):
- जिला परिषद की बैठक बुलाना, अध्यक्षता करना और चलाना।
- मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और उनके ज़रिए जिला परिषद के सभी अधिकारियों-कर्मचारियों पर प्रशासनिक पर्यवेक्षण और नियंत्रण; सारे रिकॉर्ड तक पहुँच।
- जिला परिषद के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन पर समग्र पर्यवेक्षण।
- प्राकृतिक आपदा में तुरंत राहत के लिए CEO से सलाह करके साल में कुल ₹1 लाख तक की मंज़ूरी।
- जिले के ब्लॉकों का दौरा और पंचायत समितियों के कामों व रिकॉर्ड का निरीक्षण, जिसकी रिपोर्ट जिला परिषद को देनी होती है।
- हर साल CEO के काम पर रिपोर्ट निदेशक, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास को भेजना।
उपजिला प्रमुख जिला प्रमुख की गैरमौजूदगी में बैठक की अध्यक्षता करता है और उसके सौंपे अधिकार निभाता है। जिला प्रमुख को ₹16,698 प्रति माह मानदेय मिलता है।
इनमें से कोई पद कैसे पाएँ
- वार्ड पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य या जिला परिषद सदस्य: योग्यता पूरी करें (कम से कम 21 साल, उसी क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम, घर में चालू शौचालय आदि — धारा 19), तय समय पर नामांकन भरें और ज़मानत राशि जमा करें, फिर चुनाव जीतें।
- उपसरपंच: पहले वार्ड पंच चुना जाना ज़रूरी, फिर पंचायत की पहली बैठक में उपसरपंच का चुनाव जीतना।
- प्रधान या जिला प्रमुख: पहले पंचायत समिति या जिला परिषद का सदस्य चुना जाना ज़रूरी, फिर निर्वाचित सदस्यों के बीच होने वाला चुनाव जीतना। सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख के पद SC, ST, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित होते हैं (धारा 16), इसलिए पहले देखें कि सीट किसके लिए आरक्षित है।
कार्यकाल, इस्तीफा और हटाना
- कार्यकाल: हर संस्था अपनी पहली बैठक से 5 साल चलती है (धारा 17); उपाध्यक्ष तभी तक पद पर है जब तक सदस्य है (धारा 30)।
- इस्तीफा (धारा 36): सरपंच, उपसरपंच, पंच → विकास अधिकारी; प्रधान → जिला प्रमुख; उपप्रधान व समिति सदस्य → प्रधान; जिला प्रमुख → संभागीय आयुक्त; उपजिला प्रमुख व जिला परिषद सदस्य → जिला प्रमुख। 15 दिन बाद लागू, अगर वापस न लिया जाए।
- अविश्वास प्रस्ताव: अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के खिलाफ़ एक-तिहाई सदस्यों के नोटिस पर, तीन-चौथाई के समर्थन से; पद संभालने के 2 साल तक नहीं (धारा 37)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वार्ड पंच की सैलरी कितनी होती है?
मासिक मानदेय नहीं मिलता; ₹276 प्रति बैठक भत्ता मिलता है (पंचायती राज अधिसूचना 210, 1 अप्रैल 2023 से)।
वार्ड पंच का क्या काम होता है?
वह अपने वार्ड से चुना गया ग्राम पंचायत का सदस्य है: पंचायत की बैठकों में फ़ैसलों पर वोट देता है, उपसरपंच चुनता है और अपने वार्ड की बात पंचायत में रखता है (धारा 12, 27)।
पंचायत समिति सदस्य कौन होता है?
ब्लॉक की पंचायत समिति के किसी निर्वाचन क्षेत्र से सीधे चुना गया सदस्य; यही सदस्य आपस में से प्रधान चुनते हैं। भत्ता ₹483 प्रति बैठक।
प्रधान का चुनाव कौन करता है?
पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्य, आपस में से (धारा 28)। विधायक और सरपंच समिति के सदस्य होते हुए भी इस चुनाव में वोट नहीं देते।
जिला प्रमुख कैसे चुना जाता है?
जनता सीधे नहीं चुनती। जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य आपस में से जिला प्रमुख और उपजिला प्रमुख चुनते हैं (धारा 29)।
जिला प्रमुख की सैलरी कितनी है?
₹16,698 प्रति माह मानदेय, 1 अप्रैल 2025 से; प्रधान को ₹11,689।
क्या विधायक पंचायत समिति का सदस्य होता है?
हाँ, क्षेत्र के विधायक पंचायत समिति के, और सांसद-विधायक जिला परिषद के पदेन सदस्य होते हैं। वे बैठकों में वोट दे सकते हैं, पर प्रधान या जिला प्रमुख के चुनाव और हटाने में नहीं (धारा 13, 14)।
स्रोत
हर तथ्य इन्हीं आधिकारिक दस्तावेज़ों से लिया गया है
- राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार की प्रति) (cdnbbsr.s3waas.gov.in)
- राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 — इंडिया कोड (indiacode.nic.in)
- पंचायती राज विभाग — मानदेय अधिसूचना (1 अप्रैल 2025 से) (jankalyanfile.rajasthan.gov.in)
- पंचायती राज विभाग — बैठक भत्ता अधिसूचना 210 (21.02.2023) (jankalyanfile.rajasthan.gov.in)
- SEC अधिसूचना 4191 — पंच व सरपंच के मुक्त चुनाव चिह्न (sec.rajasthan.gov.in)
- SEC अधिसूचना 4196 — पंचायत समिति व जिला परिषद के चिह्न (sec.rajasthan.gov.in)
यह आम जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं — नामांकन या किसी आधिकारिक काम से पहले राज्य निर्वाचन आयोग / रिटर्निंग अधिकारी से पुष्टि करें। अस्वीकरण