राजस्थान में सरपंच ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठकें बुलाता है और उनकी अध्यक्षता करता है, पंचायत के रिकॉर्ड का ज़िम्मेदार है, पंचायत के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन की सामान्य ज़िम्मेदारी उसी की है, और पंचायत के कर्मचारियों व पंचायत को सौंपे गए अधिकारियों के काम पर प्रशासनिक नियंत्रण रखता है (धारा 32)। सरपंच न हो तो उपसरपंच उसके सारे अधिकार इस्तेमाल करता है। सरपंच को अविश्वास प्रस्ताव से हटाया जा सकता है, पर इसके लिए पंचायत के निर्वाचित सदस्यों में से तीन-चौथाई का समर्थन चाहिए और पद संभालने के दो साल तक ऐसा प्रस्ताव नहीं आ सकता (धारा 37)।
एक नज़र में
- सरपंच: ग्राम सभा व पंचायत की बैठक बुलाना-चलाना, रिकॉर्ड, वित्तीय व कार्यकारी प्रशासन, कर्मचारियों पर नियंत्रण (धारा 32)।
- उपसरपंच: सरपंच जो अधिकार लिखकर सौंपे; सरपंच न हो तो सरपंच के सारे अधिकार।
- ग्राम सभा साल में कम से कम दो बार बैठती है और सरपंच से किसी भी योजना, आय और खर्च पर स्पष्टीकरण माँग सकती है (धारा 8क, 8ङ)।
- अविश्वास प्रस्ताव: एक-तिहाई सदस्यों का नोटिस, तीन-चौथाई के समर्थन से पास; पहले दो साल नहीं (धारा 37)।
- राज्य सरकार दुराचार पर सुनवाई के बाद हटा सकती है; हटाया गया व्यक्ति 5 साल चुनाव नहीं लड़ सकता (धारा 38)।
- मानदेय ₹6,679 प्रति माह (1 अप्रैल 2025 से); कार्यकाल पहली बैठक से 5 साल।
सरपंच के अधिकार और कर्तव्य (धारा 32(1))
अधिनियम के अनुसार सरपंच —
- ग्राम सभा की बैठक बुलाने का ज़िम्मेदार होगा और उसकी अध्यक्षता करेगा।
- ग्राम पंचायत की बैठक बुलाएगा, उसकी अध्यक्षता करेगा और उसे नियम से चलाएगा।
- पंचायत के रिकॉर्ड के रख-रखाव का ज़िम्मेदार होगा।
- पंचायत के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन की सामान्य ज़िम्मेदारी उसकी होगी।
- पंचायत के कर्मचारियों, और किसी दूसरे प्राधिकारी ने जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को पंचायत को सौंपा है, उनके काम पर प्रशासनिक पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखेगा।
- अधिनियम के तहत काम-काज के लिए वे अधिकार इस्तेमाल करेगा जो अधिनियम या उसके नियम पंचायत को देते हैं।
- राज्य सरकार या पंचायतों के प्रभारी अधिकारी को तय रिपोर्ट, रिटर्न और रिकॉर्ड भेजेगा।
- पंचायत के प्रस्ताव से या सरकार के नियमों से मिले दूसरे अधिकार और कर्तव्य निभाएगा।
धारा 32 का परंतुक: अगर राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना से ऐसा निर्देश दे, तो सरपंच ऊपर के 4 से 8 नंबर वाले अधिकार धारा 55-क में बनी प्रशासन एवं स्थापना समिति की पूर्व स्वीकृति लेकर ही इस्तेमाल करेगा।
उपसरपंच — चुनाव और अधिकार (धारा 27, 32(2), 32(3))
हर ग्राम पंचायत में एक उपसरपंच होता है। पंचायत गठित होते ही सक्षम प्राधिकारी पंचायत की बैठक बुलाता है, उसकी अध्यक्षता करता है (खुद वोट नहीं देता) और उसी बैठक में उपसरपंच चुना जाता है (धारा 27)। 2026 में यह चुनाव पंच-सरपंच चुनाव के अगले दिन, नए चुने पंच और सरपंच गुप्त मतदान से करेंगे।
उपसरपंच —
- सरपंच नियमों के तहत जो अधिकार और कर्तव्य लिखित आदेश से सौंपे, उन्हें निभाएगा।
- सरपंच के न होने पर (पद खाली हो या किसी और कारण से) सरपंच के सारे अधिकार और कर्तव्य निभाएगा।
- पंचायत के प्रस्ताव या सरकार के नियमों से मिले दूसरे अधिकार निभाएगा।
सरपंच और उपसरपंच दोनों न हों तो सक्षम प्राधिकारी पंचायत के किसी निर्वाचित सदस्य को सरपंच के अधिकार सौंपता है (धारा 32(3))। उपसरपंच तभी तक पद पर रहता है जब तक वह पंचायत का सदस्य है (धारा 30, 36(5))।
ग्राम पंचायत क्या-क्या काम करती है (धारा 50, पहली अनुसूची)
सरपंच इन्हीं कामों के लिए पंचायत का प्रशासन चलाता है। पंचायत ये काम राज्य सरकार की तय शर्तों के अधीन करती है; पूरी सूची अधिनियम की पहली अनुसूची में है। मुख्य काम:
- पंचायत क्षेत्र की सालाना विकास योजना और सालाना बजट बनाना; प्राकृतिक आपदा में राहत; सार्वजनिक संपत्ति से अतिक्रमण हटाना।
- जन्म, मृत्यु और विवाह का पंजीकरण; गाँव के ज़रूरी आँकड़े और पंचायत का रिकॉर्ड रखना।
- पेयजल: कुएँ, टंकी और तालाब बनाना-सुधारना; हैंडपंप और पंप-टंकी योजनाओं का रख-रखाव।
- गाँव की सड़कें, नालियाँ और पुलिया बनाना व रख-रखाव; सार्वजनिक गलियों में रोशनी।
- सफ़ाई: सार्वजनिक सड़कों, नालियों, तालाबों व कुओं की सफ़ाई; श्मशान-कब्रिस्तान का रख-रखाव; ग्रामीण शौचालय।
- ग्रामीण आवास: मुफ़्त आवासीय भूखंडों का आवंटन, घरों और संपत्तियों का रिकॉर्ड।
- चारागाह, सामुदायिक भूमि, खलिहान और पशु-स्थलों का नियंत्रण; मेले और उत्सव।
- गरीबी उन्मूलन योजनाओं के लाभार्थियों का चयन ग्राम सभा के ज़रिए; बुढ़ापा और विधवा पेंशन में सहायता।
- प्राथमिक स्कूलों में बच्चों, खासकर लड़कियों का पूरा नामांकन और उपस्थिति; आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी।
ग्राम सभा और वार्ड सभा — सरपंच से हिसाब कौन माँग सकता है (धारा 3, 7, 8क, 8ङ)
ग्राम सभा में पंचायत क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज सभी लोग सदस्य हैं। इसकी साल में कम से कम दो बैठकें होती हैं — वित्त वर्ष की पहली और आखिरी तिमाही में। कुल सदस्यों के दसवें हिस्से से ज़्यादा लोग लिखकर माँगें, तो 15 दिन के भीतर बैठक बुलानी होती है (धारा 8क)।
पहली तिमाही की बैठक में पंचायत पिछले साल का लेखा-जोखा, प्रशासनिक रिपोर्ट, इस साल के कार्यक्रम और पिछली ऑडिट रिपोर्ट रखती है; आखिरी तिमाही की बैठक में उस साल का खर्च और कार्यक्रमों की प्रगति।
ग्राम सभा के मुख्य काम (धारा 8ङ):
- विकास योजनाओं और कामों को प्राथमिकता के क्रम में मंज़ूरी देना।
- गरीबी उन्मूलन और दूसरी योजनाओं के लाभार्थियों का चयन।
- सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट), जैसे कमज़ोर वर्गों को दिए भूखंडों का।
- किसी भी गतिविधि, योजना, आय और खर्च के बारे में सरपंच और पंचायत सदस्यों से स्पष्टीकरण माँगना।
वार्ड सभा: हर वार्ड के सभी वयस्क इसके सदस्य हैं और इसकी भी साल में दो बैठकें होती हैं (धारा 3)। यह विकास योजनाओं के प्रस्ताव और प्राथमिकता तय करती है, लाभार्थियों की पहचान करती है, पेंशन व सब्सिडी पाने वालों की पात्रता जाँचती है और वार्ड में हुए कामों का सामाजिक अंकेक्षण करती है (धारा 7)।
सरपंच को कैसे हटाया जा सकता है — अविश्वास प्रस्ताव (धारा 37)
- पंचायत के सीधे चुने गए सदस्यों में से कम से कम एक-तिहाई के हस्ताक्षर वाला लिखित नोटिस, प्रस्ताव की प्रति के साथ, कोई एक हस्ताक्षरकर्ता सक्षम प्राधिकारी को खुद जाकर देता है।
- सक्षम प्राधिकारी नोटिस मिलने के 30 दिन के भीतर पंचायत कार्यालय में बैठक बुलाता है, सदस्यों को कम से कम 7 दिन पहले सूचना देता है और खुद (या उसका नामित अधिकारी) अध्यक्षता करता है।
- बैठक और बहस स्थगित नहीं हो सकती; बहस अधिकतम 2 घंटे चलती है, फिर मतदान होता है। कोरम: वोट के हकदार सदस्यों का एक-तिहाई।
- प्रस्ताव तभी पास होता है जब पंचायत के निर्वाचित सदस्यों में से कम से कम तीन-चौथाई समर्थन करें। पास होने पर पंचायत के नोटिस बोर्ड पर सूचना लगते ही सरपंच का पद खाली हो जाता है।
- पद संभालने के 2 साल के भीतर अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस नहीं दिया जा सकता; प्रस्ताव गिरने या कोरम न होने पर अगले 1 साल तक उसी सरपंच के खिलाफ़ नया प्रस्ताव नहीं आ सकता।
यही नियम उपसरपंच, प्रधान, उपप्रधान, जिला प्रमुख और उपजिला प्रमुख पर भी लागू है।
राज्य सरकार द्वारा हटाना और निलंबन (धारा 38): सुनवाई का मौका और ज़रूरी जाँच के बाद राज्य सरकार ऐसे सरपंच को हटा सकती है जो काम करने से मना करे या असमर्थ हो जाए, या कर्तव्य में दुराचार या अपमानजनक आचरण का दोषी हो। हटाया गया व्यक्ति 5 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता। जाँच शुरू होने पर, या नैतिक अधमता वाले अपराध का मुकदमा अदालत में लंबित हो तो, सरकार सरपंच को निलंबित कर सकती है।
ग्राम सभा की सिफ़ारिश पर निलंबन: ग्राम सभा सरपंच के निलंबन का प्रस्ताव पास करे, तो सरकार उसे कलेक्टर को भेजती है; कलेक्टर ग्राम सभा की विशेष बैठक बुलाता है, और उसमें मौजूद व वोट देने वाले सदस्यों में से दो-तिहाई प्रस्ताव की फिर पुष्टि करें, तभी निलंबन हो सकता है। सरपंच के 2 साल पूरे होने से पहले ऐसा प्रस्ताव नहीं आ सकता। वार्ड सभा की सिफ़ारिश पर पंच के लिए भी यही प्रक्रिया है।
इस्तीफा, कार्यकाल और मानदेय
- इस्तीफा: सरपंच, उपसरपंच या पंच अपने हाथ से लिखकर विकास अधिकारी को इस्तीफा देते हैं; यह मिलने के 15 दिन बाद लागू होता है, अगर इस बीच वापस न लिया जाए (धारा 36)।
- कार्यकाल: पंचायत की पहली बैठक से 5 साल (धारा 17)।
- मानदेय: सरपंच को ₹6,679 प्रति माह, 1 अप्रैल 2025 से (पंचायती राज विभाग की अधिसूचना)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सरपंच के मुख्य अधिकार क्या हैं?
ग्राम सभा व पंचायत की बैठक बुलाना और चलाना, पंचायत का रिकॉर्ड, पंचायत के वित्तीय और कार्यकारी प्रशासन की सामान्य ज़िम्मेदारी, और पंचायत के कर्मचारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण (पंचायती राज अधिनियम धारा 32)।
उपसरपंच के अधिकार क्या हैं?
सरपंच जो अधिकार लिखित आदेश से सौंपे वे, और सरपंच का पद खाली हो या सरपंच न हो तो सरपंच के सारे अधिकार (धारा 32(2))।
क्या सरपंच को हटाया जा सकता है?
हाँ — अविश्वास प्रस्ताव से, जिसके लिए पंचायत के निर्वाचित सदस्यों का तीन-चौथाई समर्थन चाहिए और जो पद संभालने के 2 साल बाद ही आ सकता है (धारा 37); या दुराचार पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार के आदेश से (धारा 38)।
ग्राम सभा की बैठक साल में कितनी बार होती है?
कम से कम दो बार — वित्त वर्ष की पहली और आखिरी तिमाही में। दसवें हिस्से से ज़्यादा सदस्य लिखकर माँगें तो 15 दिन के भीतर (धारा 8क)।
क्या ग्राम सभा सरपंच से हिसाब माँग सकती है?
हाँ। ग्राम सभा किसी भी गतिविधि, योजना, आय और खर्च पर सरपंच और पंचायत सदस्यों से स्पष्टीकरण माँग सकती है (धारा 8ङ), और पहली तिमाही की बैठक में पंचायत को पिछले साल का लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट रखनी होती है।
सरपंच इस्तीफा किसे देता है?
विकास अधिकारी को, अपने हाथ से लिखकर; 15 दिन बाद लागू होता है अगर वापस न लिया जाए (धारा 36)।
सरपंच की सैलरी कितनी है?
वेतन नहीं, मानदेय मिलता है — ₹6,679 प्रति माह, 1 अप्रैल 2025 से।
स्रोत
हर तथ्य इन्हीं आधिकारिक दस्तावेज़ों से लिया गया है
- राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 (पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार की प्रति) (cdnbbsr.s3waas.gov.in)
- राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 — इंडिया कोड (indiacode.nic.in)
- पंचायती राज विभाग — मानदेय अधिसूचना (1 अप्रैल 2025 से) (jankalyanfile.rajasthan.gov.in)
- राज्य निर्वाचन आयोग — पंचायती राज निर्वाचन विधि पुस्तिका 2026 (sec.rajasthan.gov.in)
यह आम जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं — नामांकन या किसी आधिकारिक काम से पहले राज्य निर्वाचन आयोग / रिटर्निंग अधिकारी से पुष्टि करें। अस्वीकरण